पूर्वजों को समर्पित साल 15 दिन पितृ पक्ष कहलाते हैं.

पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का समय है.

इस दौरान पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है.

धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु के बाद प्रेत योनी से बचाने के लिए पितृ तर्पण का बहुत महत्व है.

मान्यता है कि यदि पिंडदान नहीं किया जाता है तो पितरों की आत्मा दुखी और असंतुष्ट रहती है.

पितृऋण से छुटकारा पाने के लिए भी बेटों का पिंडदान करना जरूरी होता है.अगर किसी व्यक्ति के पुत्र नहीं हैं, 

तो ऐसे में परिवार पुत्री, पत्नी और बहू अपने पिता के श्राद्ध और पिंड का दान कर सकती हैं.

पितृ पक्ष में अपने मृत परिजनों का पिंडदान करना सुख, समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस साल पितृ पक्ष 29 सितंबर से 14 अक्टूबर तक रहेंगे.

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